Saturday, November 5, 2011

मगही ‌‌दिवस के रूप में मनी क‌वियोगेश की जयंती








बिहार के बड़े जनकवि योगेश्वर प्रसाद सिंह योगेश को उनकी जयंती पर मगही दिवस के रूप में मनाकर याद किया गया। मगही के लिए कई तरीके से ये दिन ऐतिहासिक साबित हुआ। पहली बार मगही के साथ राजनीतिक, सांस्कृतिक और साहित्यिक ताकतें एक साथ एक मंच पर दिखीं। कार्यक्रम मगही के पहले महाकाव्य गौतम के रचयिता महाकवि योगेश के गांव पटना जिले के नीरपुर में हुआ। इसमें कवि योगेश की स्मृति में रंगीन कैलेंडर जारी हुआ, एक पुस्तकालय का ‌शिलान्यास हुआ और एक मगही पत्रिका बंगमागधी का लोकार्पण किया। साथ ही मगही अकादमी के अध्यक्ष उदयशंकर शर्मा के नेतृत्व में जय मगही स्वा‌भिमान यात्रा का आगाज किया गया। मंच पर बिहार के सहकारिता मंत्री रामाधार सिंह, गोरखपुर के सांसद योगी आदित्यनाथ, बाढ़ के विधायक ज्ञानेंद्र सिंह ज्ञानू, पूर्व सांसद एवं मंत्री विजयकृष्ण, स्वामी हरिनारयणानंद उपस्थित थे। भोजपुरी सुपरस्टार मनोज तिवारी मंच पर सांस्कृतिक खेमें का नेतृत्व कर रहे थे तो मगही अकादमी के अध्यक्ष उदयशंकर ने मगही साहित्यकारों का। वहां जुटी भारी भीड़ ने हाथ उठाकर, वक्ताओं से सीधा संवाद कर लोकभाषाओं के प्रति अपने जुड़ाव को खुलकर जाहिर किया।

सहकारिता मंत्री रामाधार सिंह ने मगही में ही संबोधित करते हुए कहा कि मगही मगध की धरोहर है और इसे आठवीं अनुसूची में पहुंचाना ही योगेश जी जैसे रचनाकार की श्रद्धांजलि होगी। गोरखपुर के सांसद योगी आदित्यनाथ ने कहा कि मगही हिंदी का प्राण है। महाकव‌ि योगेश ने इसे नई उंचाई प्रदान की। उदयशंकर शर्मा ने योगेश जी को अपना दत्तक पिता बताते हुए जनसमूह से मगही में ही न्योता और पत्र व्यवहार करने का शपथ दिलाया। भोजपुरी सुपरस्टार मनोज तिवारी ने लोगों से वादा किया कि वह मगही में एक एलबम जरूर निकालेंगे। मनोज ने महाकाव्य गौतम के काव्य अंश का पाठ कर लोगों की वाहवाही लूटी। कार्यक्रम संचालन साधुशरण सिंह सुमन ने ‌किया। शुरूआत में मगही साहित्यकारों डा रामाश्रय झा, धनंजय श्रोत्रिय, ओंकार निराला, राजकुमार प्रेमी, भाई परमेश्वरी, ब्रजनंदन जी आदि ने अपने विचार रखे और कविताओं का पाठ किया। फिर भोजपुरी क्लासिकल सिंगर राकेश उपाध्याय ने अपने भजनों से लोगों की तालियां बटोरी। महाकवि योगेश फाउंडेशन के सचिव अनिल कुमार ने अत‌िथियों को स्मृत‌िचिन्ह भेंट कर कार्यक्रम का समापन किया।

Tuesday, October 18, 2011

मगही ‌दिवस पर जारी होगा क‌‌वि का कैलेंडर



कागज के समंदर में कलम की नाव लेकर के। निकला हूं शहर की भीड़ में मैं गांव लेकर के।।

इन पंक्तियों को जीनेवाले बिहार के प्रतिष्ठित कव‌ि योगेश्वर प्रसाद सिंह योगेश की जयंती उनके गांव पटना जिले के नीरपुर में २३ अक्तूबर को मगही दिवस के रूप में जोरदार तरीके से मनाने की तैयारी है। विभिन्न वादों के दौर में अपनी जड़ों से जुड़े रहनेवाले इस जनकवि को स्मरण, नमन करते रहने के लिए कैलेंडर का सहारा लिया जा रहा है। मगही दिवस पर उनके नाम पर एक पुस्तकालय और लोकभाषा संरक्षण केंद्र का शिलान्यास होगा, साथ ही उनकी तसवीर और जीवन चरित का एक कैलेंडर भी जारी किया जाएगा। यह संभवतः पहली बार होगा जब किसी आधुनिक लोकभाषा कव‌ि का कैलेंडर जारी होगा। मगही के प्रथम महाकाव्य गौतम के रचयिता को सैंकड़ों घरों तक पहुंचाने के इस प्रयास को साहित्यकार काफी सकारात्मक रूप में देख रहे हैं।

मगही आंदोलन को बल देने के लिए इस कार्यक्रम में बिहार सरकार के प्रभावशाली स्वास्थ्य मंत्री अश्विनी चौबे, सहकारिता मंत्री रामाधार सिंह और मगही अकादमी के अध्यक्ष उदयशंकर शर्मा मौजूद रहेंगे। यह मंच सिर्फ मगही का नहीं होगा। इस पर पूर्वांचल के सांसद, विधायकों के साथ भोजपुरी सुपरस्टार मनोज तिवारी और भोजपुरी क्लासिकल सिंगर राकेश उपाध्याय भी मौजूद होंगे। क्योंक‌ि योगेश सिर्फ हिंदी और मगही के कवि नहीं थे, बल्कि सभी लोकभाषाओं के आंदोलनों में सहभागी थे। उनकी शुरूआत हिंदी से हुई थी और १९५२ में ‌आचार्य शिवपूजन सहाय की प्रेरणा से रहस्यवादी हिंदी कविताओं का संग्रह विभा सामने आई थी। पर जन और जमीन से जुड़ाव ने उन्हें १९५४-५५ से मगही की ओर मोड़ दिया। हिंदी में लगातार लेखन करते रहे पर बड़ी स्वीकार्यता उन्हें मगही के महाकवि के रूप में ही मिली थी। उनके करीबी साहित्यकारों का आरोप है कि बिहार के खेमेवादी हिंदी कवि जानबूझकर उन्हें मगही कवि घोषित करते थे।